Tuesday, 4 April 2017

दस सिर वाला रावण ओर करुणा की मूरत राम

एक बहुत ही सुंदर घटना,जो हम बचपन से ही सुनते आए है। वो यूं है कि

राम, दशरत पुत्र, सीता पति । अयोध्या का राजा,
बात उन दिनों की जब राम ने राज गंवाया,त्याग किया,चाहे धोखे से पर शालीनता से उन्होंने कोई विरोध नहीं किया । जंगल गए, बनवास लिया, बहुत सी कठिनाइयां झेली, उनकी पत्नी सीता का अपहरण श्री लंका के राजा रावण द्वारा हुआ।

पत्नी के प्रेम, वियोग, पीड़ा, चिंता ग्रस्त रहे।
उसे ढूंढते ढूंढते दक्षिण भारत पँहुँचे, सेना बनाई, श्री लंका से युद्ध किया, उसे हराया, मार गिराया ।

इस घटना का महत्वपूर्ण क्षण यह है कि कहते हैं कि चलो! कुछ समय के लिए इस घटना के आध्यात्मिक पक्ष से मान भी लेते हैं कि श्री लंका पति रावण के दस सिर थे ।
रावण के वध और श्री लंका की जीत के बाद,अयोध्या की वापसी से पहले राम ने हिमालय जाने का निर्णय करना चाहा । क्योंकि उनके मन मे पक्षाताप था कि उन्होंने हत्या की, पाप किया, वो भी उस व्यक्ति की, जो एक लालची, वासनिक के साथ साथ धार्मिक,तपस्वी, भक्त भी था । या यूं कह लो कि उस रावण के दस सिरों के नौ सिरों में पाप के साथ एक सिर में विवेक और ज्ञान था, जो राम को पक्षाताप की आग में झुलस रहा था।
दस सिर में से कोई अहंकारी, कोई लालची, कोई क्रोध से भरा, किसी मे नफरत, वासना ओर बदसूरती इत्यादि थी, पर एक सिर जिसमें गज़ब की बहादुरी,शक्ति, धार्मिकता,भक्ति, उपासना जैसी खूबसूरती भी थी।

बस, यही एक कारण, रावण का दसवां सिर था, जो बार बार राम के ह्रदय में करुणा, उदारता, पैदा कर रहा था, जो राम पक्षाताप  करना चाहते थे कि उनसे नौ बुराई को समाप्त करने के लिए एक अच्छे सिर यानी एक अच्छाई की भी हत्या हो गई। जिसका उन्हें अफसोस जिंदगी भर रहा।

#Gambhir Says

Sunday, 2 April 2017

Who is He?

Who is He, Who Himself Creates The World
Who is He, Fashions The World ? &
Who is He, Himself Keeps it in Order?

He Having Created The Beings.
He Oversees their Birth & Death.

Unto Whom Should We Speak,
When He Himself is All in All?
Nanak Asks.

कौन है वो?
जो आप ही सृष्टि को रचना करता है,
कौन है वो?
जो आप ही इस सृष्टि की सजावट (पहाड़, नदियां,  पेड़,वादियां इत्यादि) करता है।
कौन है वो?
जो आप ही इस सृष्टि की देखभाल करता है।
कौन है वो?
जिसने इस सृष्टि में कई प्रकार के जीव-जंतु पैदा किये हैं।
कौन है वो?
जिसने इस सृष्टि में जीवन और मृत्यु का खेल रचाया हुआ है।

गुरु नानक जी पूछते है
कौन है वो?
जिस के बिना हमारी कोई और फरियाद नहीं सुन सकता।

"वह स्वंय ही है, जो ये सब कुछ करने में समर्थ है।
24 पौहड़ी, 476, आसा दी वार,SGGS

परम् पद। (Highest Position)

#परम्_पद  #Highest_Position

मनुष्य आत्मा, परमात्मा से बिछड़ने से वियोग अथवा वैराग्य (Detachment) हो गई है। इसको फिर से परमात्मा से मिलना है।  बिछड़ना वैराग है तथा मिलना संयोग। वैरागी आत्मा से संयोग स्थापित करना तथा अभेद होना परम् पद है।

Saturday, 1 April 2017

He Casts His Glance of Grace.

ਆਪੇ ਭਾਂਡੇ ਸਾਜਿਅਨ, ਆਪੇ ਪੂਰਣ ਦੇਇ,
ਇਕਨੀ ਦੁਧੁ ਸਮਾਲੀਐ, ਇਕ ਚੁਲੈ ਰਹਿਨ ਚੜੇ।।

ਇਕਿ ਨਿਹਾਲੀ ਪੈ ਸਵਨਿ, ਇਕਿ ਉਪਰਿ ਰਹਿਨ ਖੜੇ।।
ਤਿਨਾ ਸਵਾਰੇ ਨਾਨਕਾ, ਜਿਨ ਕਉ ਨਦਰਿ ਕਰੇ।।

He Casts His Glance of Grace.

He himself  fashioned The Vessel of the body, & fills it.
Into some, milk is poured, while others remain on the fire.

Some lie down & sleep on soft beds, while others remain watchful.
He adorns these upon whom.

He Casts His Glance of Grace.
#Nanak_Says.

प्रभु ने जीव को शरीर रूपी बर्तन दिया है, जसमें उसने कुछ न कुछ डालना ही है, जिनकी किस्मत में उसके कर्मों के अनुसार दुःख-सुख हैं, वो परमात्मा, आप ही डालता है।
जैसे किसी के बर्तन में दूध रूपी आराम है, और किसी के बर्तन को जलते चूल्हे पर खाली ही तपते रहना है, भाव कष्ट सहने है।
कईयों के भाग्य में चैन की नींद और चादर तान के सोना लिखा है, तो कईयों के उनके बिस्तर के ऊपर खड़े रहकर,सुरक्षा के लिए सारी सारी रात चौकीदारी की ड्यूटी लगी है। भाव,
जिन पर परमात्मा की मेहर होती है, उनका जीवन सुधार देता है । #NanakSays

प्रेम_इतफाक_से_होता_है

#प्रेम_इतफाक_से_होता_है. !

मैंने अपने दोस्तों को उनकी शादी से पहले अपनी भावी पत्नी के लिए बहुत से सुंदर सपने संजोते देखा है,
पर उन्हें जो मिला उसे 'पहली नज़र' में जब उन्होंने देखा, तो उनके सारे सपने तो पूरे होते नहीं दिख रहे थे, पर अचानक अचन्चेत,से बिना शर्त "YES" हुई थी, क्योंकि सच्चा, संयोगी और सहज़ प्रेम उन पर हावी सा होता दिखा ।

बिल्कुल यही अवस्था पर्मात्मा से प्रेम की होती है। प्रभु से प्रेम भी अचानक और इतफाक के संयोग से सच्चे गुरु की शिक्षा, युक्तियों के बिना भी हो सकती हैं।
परंतु इस सहज़ अवस्था को पाने के लिए कोई कठोर परिश्रम भी नहीं करना पड़ता बल्कि अपने आप को निर्मता में लाकर पाँच अवगुण (काम, करोध, लोभ, मोह, अंहकार) को काबू करने की चेष्ठा कर उस द्वारा दिए जा रहे दुख-सुख को बराबर मान उसके कुदरती नियम को सही मानने का संकल्प करना जरूरी है । जो कि हकीकत है।

परमेश्वर की कुदरत के नियमों से छेड़-छाड़ और उसकी उल्लंघना वर्तमान और भविष्य में बहुत सी आपदाओं को जन्म दे सकतीं हैं. और उसके नियमों को झुठलाना, ज्योतिष ज्ञान की आड़ में लोगों का बेवकूफ बना, व्यर्थ के कर्मकांड में हिस्सा लेना विशेष कर शिक्षित व्यक्ति का, सुझवान बुद्धि का परिचय नहीं देता ।

#Seriously [02-04-2012]

स्त्री की परिभाषा

#स्त्री:-

किसी भी आदर्श समाज की उत्पति मे स्त्री का योगदान सबसे अधिक है. चाहे वो माँ के रूप में अपने फ़र्ज़ की पूर्ति करनी हो या आदर्श बेटी,पत्नी, बहु और सासू के रूप में समाज की अगवाई देनी हो।
पुराने समय से धर्म और समाज के ठेकेदारों की ओर से स्त्री को पैरों की जुती समझ कर घर की चारदिवारी के अंदर बंद करके उस का अपमान किया जाता था ।
स्त्री को निंदनीय, भगवान की मज़ेदार गलती कह कर पशुओं से भी बुरे स्थान, समाज ने प्रदान किए हुए थे ।
क्षी गुरु नानक देव जी ने आसा दी वार में
'सो किओ मंदा आखीऐ,जितु जंमहि राजान' ।।कह कर स्त्री को समाज में इज्जत प्रदान की तथा मर्दों के बराबर मान-सम्मान दिलाया।

जहाँ गुरु सहिबान ने नये समाज की संरचना के लिए समाज के संगठन और सुधार को प्राथमिकता दी, वहीं स्त्री को समाज के प्रति बनती उसकी जिम्मेदारी का एहसास करवाया ।

गुरु साहिब ने कहा कि स्त्री केवल श्रंगार, या भोग विलास का साधन ही नहीं बल्कि आदर्श समाज के विकास के लिए नींव का काम भी करती है। इस लिए गुरु वाली स्त्री को सहज़, संतोष तथा मीठा बोलना आदि जैसे गुण धारण करने की हिदायत दी है:-

'जाए पुछह॒ सोहागणी, तुसी राहिआ किनी गुणी ||
सहजि संतोखि सीगारीआ, मीठा बोलणी ||

#Seriously  [01-04-2012]

Friday, 31 March 2017

सिखों_की_पहचान #पगड़ी*

*सिखों_की_पहचान #पगड़ी*

किसी जमाने में पगड़ीं, पंजाबियों  की शान मानी जाती थी, समय के साथ साथ खालसा पंथ की स्थापना के समय इस पगड़ीं को  सिखों की पहचान के पांच चिन्हों यानि ड्रेस कोड यानि वर्दी में से केस के साथ एक अनिवार्य चिन्ह (निशान) घोषित किये जाने से एक पहचान के रूप में उभर कर सामने आई और आज यह पगड़ीं एक इज्जत के नाम से जानी जाने लगी।

दूर से ही हज़ारों-लाखों की गिनती के समूह में किसी एक ने भी पगड़ीं पहनी हो, दिख जाता है।
धारणा है कि जब कभी जिस किसी को किसी भी प्रकार की आपातकालीन (emergency) अवस्था में इस निशान वाले सिख की मदद ले सकता है।

जैसे कि गुरु ग्रन्थ साहिब को सुशोभित तथा बिराजमान किये गुरद्वारा साहिब में लगे निशान साहिब को देख दूर से भटकते राहगीर को एक शरण स्थल, भूखे-प्यासे को खाने की शिक्षा से महफूज़ विद्यार्थी, अस्वस्थ को इलाज़ के लिए दवाई की, तथा सबसे महत्वपूर्ण सांसारिक व आध्यात्मिक ज्ञान के जिज्ञासु की जरूरत को पूरा करने के प्रतीक समझा जाना चाहिए,

वैसे ही पगड़ीं के निशान चिन्ह वाले सिख की भी सबसे पहले फ़र्ज़ बनता है कि जिस किसी गरीब, कमज़ोर, जरूरतमंद को आप से मदद की जरूरत आंन पड़े, तन, मन, हो सके तो धन से भी उसकी सहायता करे । यही गुरु के सिख का सच्चा और स्वच्छ धर्म है।

*Seriously*