Saturday, 3 June 2017

डॉक्टर #भगवान्_भी_है #और.......?

डॉक्टर #भगवान्_भी_है #और.......?

पहले हमारे देश में वैध आम लोगों का इलाज को अपना कर्तव्य समझते थे । यही वजय है कि उनके पास जाते वक़त लोगों के मन  में यह डर नहीं होता था कि उन्हें ठग लिया जाएगा पर अब तो Doctor के पेशे को लोगों को ठगने का माध्यम माना जाता है ।

क्या यह सच नहीं है कि  टेस्टिंग के बहाने हजारों रूपए लिए जाते हैं ? जनेटिक दवाएं लिखने के बजाय उन कंम्पनियों की  पटेंट दवाएं लिखते हें , जिनसे उन्हें कमिशन मिलता है ?

डॉक्टर को फिक्र सता रही है कि सोशल मीडिया में उनके बारे में दिखाए जा रहे तथ्यों से समाज में उनकी नकारत्मक छवि बनेगी । लगभग हर एक व्यक्ति का अनुभव हे कि डॉक्टर जिस तरह से पैसा बनाते हें । इस पेशे में अनाप- शनाप कमाई न हो तो लोग अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज के दाखिले में लाखों कि फीस न दें । जिस दिन इसमें ऐसी कमाई के स्रोत्र बंद हो जायेंगे । लोग लाखों क़ी Capitision फीस देना बंद कर देंगे ।

बेहतर यह होगा कि डॉक्टर अपने पेशे में आई नकारत्मक चीज़ों को दूर करने का प्रयास करें । वे अमीर गरीब की फिक्र किये बगैर अपने पास आये मरीज की बिमारी ईमानदारी से दूर करने का प्रयास करें । इसमें कोई दो राय नहीं कि मेडिकल कोंसल खुद भ्र्ष्टाचार का अड्डा बनी हुई है ।

#Seriously

ਜੀ ਕਰਦਾ!

ਜੀ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ"
ਤੇਰੇ ਮੱਥੇ ਨੂੰ"
ਬੁੱਲ ਲਾ ਕੇ ਤੇਰੀਆਂ"
ਸਾਰੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹਾਂ"
ਚੂਸ ਲਵਾਂ"
ਪਰ ਡਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿਤੇ"
ਮੇਰੇ ਸਾਹਾਂ ਦਾ ਸੇਕ"
ਤੇਰੇ ❤ ਸੀਨੇ ਵਿੱਚ"  
ਭਖੱ  ਰਹੀਆਂ"
ਪੀੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਭਾਂਬੜ"
ਨਾ ਮਚਾਂ ਦੇਵੇ.....

Friday, 2 June 2017

How to Estimate Your Vocabulary

How_to_Estimate_Your_Vocabulary

Everyone has two vocabularies, the words they know and the words they use (the latter is call a "working vocabulary"). Most children know 5,000 words by age 5. Most adults have a working vocabulary between 4, 000 to 5,000 words depending on education, and have a passive vocabulary of 17-20,000 words. This article will help you estimate your overall (passive) vocabulary.

1, Take a large desk dictionary (not a pocket version). Calculate one percent of the pages. For example, one percent of a 600 page dictionary is six pages.

2, Pick a letter to start with. Then determine where the sixth page ends.

3, Pick an easy letter to quiz yourself with. For example, A or E and not Q or Z.

4, Using one hand, count every word you have 80 percent confidence you could explain or define, if asked. With every fifth yes, use your other hand to tally your word count, namely where each stroke actually represents five defined words; this saves counting.

5, Tally it all up. When you finish your final page, tally your answers, then multiply by 100. The resulting number is a rough estimate of your overall vocabulary.

Wedding V/s. Marriage

EnglishGrammar

Wedding vs. Marriage - these cannot be used interchangeably. A marriage is a long term relationship between two individuals. A wedding, on the other hand, is the ceremony of getting married.
Therefore, “You are invited to my wedding.” is correct and “You are invited to my marriage”. is incorrect usage.

“Their marriage was a disaster.” implies that the couple was not happy in their life together and are probably separated or divorced. On the other hand, “Their wedding was a disaster.“ implies that something happened during the wedding and that the ceremony did not go smoothly.

Thursday, 1 June 2017

नीला तारा

नीला तारा

देखो! क्या तकदीर सड़ी,
बीबी इन्द्रा जिद् फड़ी।
पन्थ खालसा मार मुकाना,
एक नुक्ते पर आज अड़ी।

की ना कोई सोच विचार,
दिल्ली से ले फोज़ चढ़ी।
सिखों ने ऐसी जंग लड़ी,
लाशों के ऊपर लाश चढ़ी।

जैसे धुल के उड़ी हैं फौजें,
सिंघों लगाई मौत झड़ी।
हो गया सब कुछ उल्टा पलटा,
उतर गई मस्ती, सिर चड़ी।

ये क्या हो गया,क्या कर बैठी
रोए पीटे सहज' खड़ी।
बोल तुझे क्यों कौन छुड़ाए,
अब नहीं आती वो घड़ी ।

खुद की कब्र ही खोद बैठी,
अपनी ना तक़दीर पढ़ी।
पंथ खालसा मार मुकाना,
काठ की घोड़ी आप चढ़ी।
हिंदी अनुवाद ।

मोह माया

मोह_माया
                 गुरु ग्रन्थ साहिब जी की बाणी, शब्दों को विचारकर, मानकर जीवन में गुरु जी की शिक्षाओं को धारण करने से एक प्रभु के नाम और उसको याद रखने का सन्देश देती है । लेकिन हमारा मन है कि मानता नहीं । क्योंकि वो रिश्ते नातों,सुख दुःख, कुछ खोने का डर, कुछ पाने की आशा, मान सम्मान, झूठ दिखावा तथा संसारिक  कार्यों में ही उलझा हुआ है । इसे ही मोह,और माया का नाम दिया गया है । जिसमें परिवार का मोह प्रमुख है और वो भी अपने बच्चों से ।
              यदि हम इस माया के अर्थ को मायाधारी, धन सम्पदा,अमीरी, पैसा, धनवान से करें तो ठीक नहीं है । क्योंकि यह हमारी मेहनत तथा हमारे पुरखों की दी हुई हमारे परिवार के पालन पोषण के लिये निजी सम्पति है।  माया एक सोच है जो हमें परमात्मा से दूर करती है ।  इस माया का धारणी कोई गरीब भी हो सकता है । जिसका ध्यान केवल अपने पुत्र, घर, फसल, व्यापार, नोकरी या अपने नाम, शोहरत आदि में है । इस माया के बन्धन से हम अपने मन में निवासी, अंतर्यामी प्रभु को पहचान नहीं पाते ।
       "माइआधारी अति अंना बोला ।।"
        "हउमै माइआ मोहणी, दूजै लगै जाइ।।" "माइआ माइआ करि मुए, माइआ किसै न साथि ।।"
                    जन्म के बाद बच्चे माया रहित, शुद्ध बरसात की टपकी बून्द जैसे पवित्र, निर्मल । पर बाद में जैसे बून्द जमीन की धूल मिटटी में मिलकर अशुद्ध होती है, वैसे ही मनुष्य बड़े होकर परिवार, बच्चे, धन पदार्थ के मोह, माया से मिलींन अपने निर्मल मन से प्रभु को भुला बैठते हैं। गुरबाणी हमें यह कतई नहीं कहती कि इन सब का त्याग करो । हमे केवल माया के प्रभाव से बचना है, जैसे हमारी जीभ, हमारे खाने और बोलने के समय हमारे दाँतों से अपने आप को बचाती है ।
"नानक माया का मारण सबदु है, गुरमुखु पाइआ जाइ ।।"
"माइआ मोहु सबदि जलाईआ।।"
कुल मिलाकर गुरबाणी हमें माया को शब्द (शिक्षा) से मारने की बात कहती है।
सिखी; कल आज और कल ।

स्वामी विवेकानंद के विचार

हर प्राणी के अंदर ईश्वर मौजूद है, जो जीव सेवा करता है, वो असल में ईश्वर की सेवा करता है। जो इस प्रकट ईश्वर की सेवा नहीं करता , वो अप्रकट ईश्वर की सेवा कैसे करेगा?

इस लिए हर स्त्री-पुरुष तथा हर प्राणी में भगवान का रूप देखो!
जन सेवा ही सर्वोत्तम धर्म की सेवा है। पत्थर पूजने वाला और मनुष्य का अनादर करने वाला कभी धार्मिक नहीं हो सकता, वो धार्मिक होने का दिखावा करता है। धर्म का अर्थ है कि अपने भीतर की शक्ति को जगाएं!

मैं मानता हूं कि यह मार्ग कठिन है लेकिन हमारे अंदर आदर्श की ज्योत जगमगा रही है। चिता न करो! असफलता की प्रवाह न करो! यह सब स्वभाविक है। असल में यह जीवन की सुंदरता है।

ਹਰ ਪ੍ਰਾਣੀ ਵਿੱਚ ਇਸ਼ਵਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ। ਜੋ ਜੀਵ ਸੇਵਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ,ਉਹ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਇਸ਼ਵਰ ਦੀ ਸੇਵਾ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਜੋ ਇਸ ਪ੍ਰਗਟ ਇਸ਼ਵਰ ਦੀ ਸੇਵਾ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ,ਉਹ ਅਪ੍ਰਕਟ ਇਸ਼ਵਰ ਦੀ ਸੇਵਾ ਕਿਵੇਂ ਕਰੇਗਾ ? ਇਸ ਲਈ ਹਰ ਇੱਕ ਪੂਰੁਸ਼,ਇਸਤਰੀ ਅਤੇ ਹਰੇਕ ਪ੍ਰਾਣੀ ਨੂੰ ਭਗਵਾਨ ਦਾ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਦੇਖੋ।
ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸੇਵਾ ਹੀ ਸ੍ਰਵੋਚ ਧਰਮ ਹੈ। ਪੱਥਰ ਪੁੱਜਣ ਵਾਲਾ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ ਦਾ ਅਨਾਦਰ ਕਰਣ ਵਾਲਾ ਕਦੀ ਧਾਰਮਿਕ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ। ਉਹ ਧਾਰਮਿਕ ਹੋਣ ਦਾ ਦਿਖਾਵਾ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਧਰਮ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ 'ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਭੀਤਰ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ ਜਗਾਈਏ।
ਮੈਂ ਜਾਣਦਾ ਹਾਂ ,ਇਹ ਮਾਰਗ ਕਠਿਨ ਹੈ, ਲੇਕਿਨ ਸਾਡੇ ਭੀਤਰ ਆਦਰਸ਼ ਦੀ ਅਗਨੀ ਜਗਮਗਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਚਿੰਤਾ ਨਾ ਕਰੋ, ਅਸਫਲਤਾ ਦੀ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨਾ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਭ ਸੁਭਾਵਕ ਹਨ। ਅਸਲ ਵਿੱਣ ਤਾਂ ਇਹੀ ਜੀਵਨ ਦੀ ਸੁੰਦਰਤਾ ਹੈ/
ਸੁਆਮੀ ਵਿਵੇਕਾ ਨੰਦ/