Saturday, 13 May 2017

लूण हरामी

गुनहगा, लूण हरामी ।।
पाहण* नाव न पारगिरामी*।।੩।। 
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जो मनुष्य पत्थर (पाहण) पर विश्वास कर उसकी पूजा, आराधना करता है कि उस की कृपा से हम ,हमारा
शरीर,परिवार,जीविका तथा दुनिया कायम है, और यही पत्थर हमें जीवन मरण से मुक्ति  (परगिरामी) भी यही करायेंगे  तो यह उस परमात्मा की नज़र में गुनाह  तथा नमक हरामी है , जिस की असल कृपा से यह सब संभव है।  Nanak Says 739-SGGS    

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