Sunday, 17 May 2020

गुरु का याद ,सम्मान व उनने दिखाए उद्देश्य।

गुरु का याद ,सम्मान व उनने दिखाए उद्देश्य।

बचपन से जवानी तक न जाने कितने शिक्षक, अर्थात गुरु हमारे रास्ते ज्ञान रूपी रोशनी देते उन स्ट्रीट लाइट की तरह आये होंगे जो अपने सिमित दायरे में रह हमें फोकस कर साथ छोड़ जाते रहे। उनकी शिक्षा रूपी रोशनी का दायरा आगे दूसरी स्ट्रीट लाइट तक का था । वे पोल हमें एक दूसरे के हवाले करते चले गए।

और न ही इधर हम उन शिक्षको  से शिक्षा ग्रहण करने के बाद न कभी मिले न वहां कुछ समय ठहर कर उनकी सुध बुध ली। क्योंकि उनकी शिक्षा ही हमारे लिये ऐसी प्रेरणा थी कि हम अपना लक्ष्य प्राप्त करें न कि उनके साथ बैठ अपना समय व्यर्थ गवाएं । 

उनकी यादें वह सम्मान अपनी जगह है और रहेगा।

#Seriously

बैलेंस

Naturally, जब भी हम किसी बात पर ध्यान न देने पर Conceived होते हैं, क्या कारण है कि हमारा ध्यान बार बार वहीं जाता है?

ऐसा बचपन में तब महसूस होता है जब साइकल चलाते समय किसी संकरे रास्ते से निकलना हो और लगे कि ज़रा सा भी बैलेंस बिगड़ा नहीं कि साईकल  हम धड़ाम से नीचे। बाद में यही बात रास्ते पड़े किसी पत्थर पर अपनाई कि टायर उस पर न चढे तो हुआ उल्टा ही ।

ऐसे ही अपने जो अच्छे-बुरे विचार होते हैं उनके चूज़ करने में भी अपना हाथ कतई तब तक नहीं है जब तक कि हम न चाहने वाले विचारों को सीरियस में कंट्रोल करने के लिए रखे रहते हैं । हालांकि उपाय भी है कि हम उन बुरे वातावरण में रहना छोड़ नहीं देते। यह सब संगत का असर है। 
समझ लो आज की डेट में इंटरनेट है जो सही लोगों में एक से बढ़ कर ज्ञान वर्धक है। पर बुरी संगत में हो तो आप जरूर ही दूसरी वेबसाइट पर चक्कर लगा कर आओगे।

एक उपाय और भी है कि हम खुल कर आने दें । आखिर देखो कि वो किस हद तक हमसे जोर आजमाइश करते हैं पर जो अच्छे विचार हैं उनकी रूटीन को भी बरकरार रखना है। इससे क्या होगा कि हमारी यदि दो प्रकार की सोसाइटी भी है तो हम जब भी अपनी किसी सोसाइटी में उस दर्जे की बात बार बार करेंगे तो धीरे धीरे आपका सर्कल घटता या बढ़ता चला जाएगा। कारण यह है कि बुरी  लत या कह लो जो तृष्णा है वो बुझती है और अच्छे विचारों की तृष्णा और जागृत होती है। यदि और खुल कर समझना है तो एक बार कमेंट बॉक्स पर यस कहिये। तो ही वो बात रखूंगा।

अधेड़ उम्र

अधेड़ उम्र में देखा जाता है कि शरीर के बुढ़ापे की ओर बढ़ते कदम से इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं। शिथिल इंद्रियां शक्ति खो देती हैं। इंद्रियां शिथिल हो जाने के कारण दर्द करने लगती हैं, तो मन का ध्यान पूजा-आराधना की ओर नहीं जा पाता।

इसलिये यह धारणा गलत निकलती है कि खेल-कूद, खान-पान, मौज-मस्ती,काम-काजी जीवन के बाद बहुत समय है नाम-जाप करने का, जिससे उस शक्ति की प्रशंसा हित इस जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति-मार्ग मिले। पर यह तब संभव हो पाए, जब शरीर साथ दे, पर इस निर्बल से ऐसा मुमकिन नहीं।

यदि किसी को मेरी इस बात पर विश्वास हो, तो "वे क्षण जो आत्म-ध्यान में व्यतीत हो और शरीर की स्मृति व शक्ति न जाए, वही क्षण मनुष्य को जीवन की ऊंचाइयों भरे वास्तविक लक्ष्य की तरफ ले जाते हैं।"

#Seriously

मैं ईष्ट हूं,

"मैं ईष्ट हूं, मेरे पास तुम्हारी चल रही धड़कन की चाबी है, यदि मैं साथ नहीं, तो तुम्हारे साथ  कुछ अप्रिय हो सकता है,। जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ, दुःख, दुर्भाग्य, तथा पीड़ाएं, तुम्हारे शरीर द्वार से बाहर हैं।"

ये सभी बातें घर का मुखिया कहे तो कोई मायने नहीं, सृष्टि के कर्ता के मुख से हों, तो शोभा देती हैं।

#Seriously

सफेद झूठ

हम यदि सफेद झूठ बोल सकते हैं, तो  हम कतई किसी पर विशवास करना नहीं सीख सकते ।, लेकिन खुद पर अपना भरोसा दिलाना हो तो?

हम खुद से दूसरों के बोले जाने वाले झूठ को पहचानेंगे तभी स्वयं में विश्वास रखना और अपनी भावनाओं पर भरोसा करना सीखेंगे।

हालाँकि, यह बहुत ज़रूरी है कि हम खुद पर, अपने निर्णयों पर और अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना सीखें।

 इससे दूसरों द्वारा आप पर विश्वास करने की और भरोसा करने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

Seriously

निंदा

कोई कहे कि 'कोई' आप की पीठ पीछे निंदा करता है, तो आपको खुश होना चाहिये कि  कोई तो है जो आपके पीछे है, बराबरी का होता सीधे निंदा करता ।👇

मिसाल के तौर पर हमारा कोई नेता है जिसकी हम लोग किसी न किसी बात की निंदा करते हैं, मजाक उड़ाते हैं । यदि उसकी हाथी की चाल में कोई फर्क नहीं आता तो वह प्रशंसनीय है । इसलिये नहीं कि  उसके कर्तव्य निष्ठा या निष्ठाहीन हैं बल्कि इसलिये कि उस का रुतबा  इतना ऊंचा है कि वो हम जैसे ऐरे गैरे को पर्सनली जानता तक नहीं। और हमे भी पता है कि जब तक उसके पास पावर है हम सीधे रास्ते उसका कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते।  यही बड़े आदमियों की बेपरवाही कहलाती हैं और हमारी बेबसी।

Friday, 27 March 2020

Soon

No Sooner..जैसे ही
(No sooner+had+ S+v3+then+S+v2)
.जैसे ही मैं गया, पिता जी आ गए।
No sooner had I come then Father came.
जैसे ही मैंने पूछा तभी वह रोने लगी।
No sooner had I asked then she began to keep.
As soon as...जैसे ही...
जैसे ही मैं आया, वह रोने लगी
As soon as I come, she began to weep.
जैसे ही मैं बोलता हूं, वह हंसती है।
As soon as I speak, she laughs.
As soon as I reached there....then
Sooner/soon  जल्द ही/जल्दी ही....
जल्द ही मैं आऊंगा, वह खाना पकाएगी।
Sooner, I will come, she will cook the food.
Sooner I will go to America..
As soon as possible, जितना जल्दी हो सके.
जितना जल्दी हो सके मैं आता हूँ।
As soon as possible I come.
As soon as possible you tell the truth
 Sooner or later  देर सवेर
देर सवेर वह खाना बनाने लगेगी
Sooner or later she began to cook food
Sooner or later she will understand to all.
Sooner or later she will getting marriage.