Sunday, 17 May 2020

बैलेंस

Naturally, जब भी हम किसी बात पर ध्यान न देने पर Conceived होते हैं, क्या कारण है कि हमारा ध्यान बार बार वहीं जाता है?

ऐसा बचपन में तब महसूस होता है जब साइकल चलाते समय किसी संकरे रास्ते से निकलना हो और लगे कि ज़रा सा भी बैलेंस बिगड़ा नहीं कि साईकल  हम धड़ाम से नीचे। बाद में यही बात रास्ते पड़े किसी पत्थर पर अपनाई कि टायर उस पर न चढे तो हुआ उल्टा ही ।

ऐसे ही अपने जो अच्छे-बुरे विचार होते हैं उनके चूज़ करने में भी अपना हाथ कतई तब तक नहीं है जब तक कि हम न चाहने वाले विचारों को सीरियस में कंट्रोल करने के लिए रखे रहते हैं । हालांकि उपाय भी है कि हम उन बुरे वातावरण में रहना छोड़ नहीं देते। यह सब संगत का असर है। 
समझ लो आज की डेट में इंटरनेट है जो सही लोगों में एक से बढ़ कर ज्ञान वर्धक है। पर बुरी संगत में हो तो आप जरूर ही दूसरी वेबसाइट पर चक्कर लगा कर आओगे।

एक उपाय और भी है कि हम खुल कर आने दें । आखिर देखो कि वो किस हद तक हमसे जोर आजमाइश करते हैं पर जो अच्छे विचार हैं उनकी रूटीन को भी बरकरार रखना है। इससे क्या होगा कि हमारी यदि दो प्रकार की सोसाइटी भी है तो हम जब भी अपनी किसी सोसाइटी में उस दर्जे की बात बार बार करेंगे तो धीरे धीरे आपका सर्कल घटता या बढ़ता चला जाएगा। कारण यह है कि बुरी  लत या कह लो जो तृष्णा है वो बुझती है और अच्छे विचारों की तृष्णा और जागृत होती है। यदि और खुल कर समझना है तो एक बार कमेंट बॉक्स पर यस कहिये। तो ही वो बात रखूंगा।

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