Whatever is in The Mind, Comes Fourthly;
Spoken Words by Themselves're Just Wind,
He Sows Seeds Poison, & Demonds Ambrosial Nectar,
Behold ! What Justice is this?
जो कुछ मनुष्य के दिल में होता है, वही शो करता है, भाव, वैसे ही मनुष्य की नीयत कुछ और है कहता कुछ और है, यह कहने की बातें है, व्यर्थ, useless।
कितने आश्चर्य का विषय है कि मनुष्य जब बीज़ता तो ज़हर है, और उम्मीद में फल जो मिले वो मीठा हो!
No comments:
Post a Comment