Saturday, 30 May 2020

अनहद

सिमरन का अर्थ है स्मरण यानि याद करना,याद रखना । आप कहीं भी किसी भी समय, किसी भी के साथ प्रभु ओर उसकी रचनाओं को , उसके फायदों को , उसके गुणों को विषय बना अपने विचारों को आधार बना, आदान प्रदान करते हुए आभार प्रकट करते हुए  भी कर सकते हैं, न कोई भूखा रहने की जरूरत, न मौन रहने की , न तप की। 

रही बात जप की, उसका आधार नाम है। किसी भी उपनाम को जिसमें प्रभु के गुणों की खुशबू आए महसूस हो, स्पर्शता की झलक आए। मीठा लगे, धड़कन की लह से लह मिला ऐसे बोलो कि सभी इन्द्रियाँ  साज़ बन सुर से सुर मिलाएं जिनका कोई गणित नहीं हो । समय की सीमा न हो।

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