अनुवाद
#जन्म_क्या_है ?
बाहर की नज़र से लगता है कि माता-पिता के मिलन से कुछ भौतिक/रसायनिक किर्याओं द्वारा जीव/मनुष्य का जन्म हो गया।
पर इस तरह नहीं है। भौतिक किर्या द्वारा तो मनुष्य/जीव का भौतिक शरीर ही बनता है, पर मनुष्य केवल शरीर नहीं है।
भौतिक शरीर के अतिरिक्त बिना शारीरिक (नॉन-फिज़िकल) भी इससे कुछ जुड़ा हुआ है।, बल्कि यह कहना अधिक उचित होगा कि भैतिक संसार में रहते साधनों की वजय, जीव को आकार रहित (नॉन-फिज़िकल) जीव को भौतिक शरीर मिला है। जीव/मनुष्य के साथ कई और नॉन-फिज़िकल पहलू जुड़े हैं। जैसे:--
जीव/मनुष्य, आत्मा या जीव-आत्मा।
यह जीव/मनुष्य का स्वंय का आप है। जीव उस प्रभु का ही अंश है तथा उसकी अंश होने के कारण इसके सारे गुण ही परमात्मा वाले ही हैं।
मनुष्य मौजूदा समय जिस अवस्था में है, यह प्रभु का अंश होने के बावजूद भी प्रभु नहीं है। प्रभु अथाह सागर समान है तथा जीव एक छोटी-सी पानी की बूंद के समान है। प्रभु , सूरज तथा जीव एक छोटी किरण समान है।
मनुष्य को प्रभु से अलग करने वाली सबसे पहली चीज़ है, उसका अहंकार (प्रभु से अपनी हस्ती अलग समझना)
Jasbir Singh Virdi
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